Hanuman Jayanti 2020 हनुमान जयंती 8 April 2020 पूजा विधि शुभ मुहूर्त पौराणिक कथा

हनुमान जयंती 2020 हनुमान जयंती 8 अप्रैल 2020 हनुमान जयंती अथार्त जिस दिन हनुमान जा जन्म हुआ था. हनुमान जयंती वर्ष में दो बार मनाई जाती है. पहले हिंदी केलेंडर के अनुसार चेत्र शुक्ल पूर्णिमा को अर्थात ग्रेगोरियन केलेंडर के मुताबिक मार्च के बीच और दूसरी कार्तिक कर्षण चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी को अर्थात सितम्बर अक्तूबर के बीच. इसके अलावा तमिलनाडु और केरल में हनुमान जयंती मार्ग शीर्ष माह को अमावस्या को. तथा उड़ीसा में वैशाख महीने के पहले दिन मनाई जाती है. चैत्र पूर्णिमा क मेष लग्न  और चित्रा नक्षत्र में प्रातः 6:03 बजे हनुमान जी का जन्म हुआ था वाल्मीकि रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को तलवार के दिन स्वाती नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था

एक तिथि को विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है जबकि दूसरी तिथि को जन्म दिवस दिवस के रूप में मनाया जाता है पहली तिथि के अनुसार इस दिन हनुमानजी सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दोड़े थे उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया था लेकिन हनुमानजी को देख कर सूर्य देव ने उन्हें दूसरा राहू समझ लिया था इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा थी एक मान्यता के अनुसार माता सीता ने हनुमानजी की भक्ति और समर्पण को देख कर उनको अमरता का वरदान दिया तथा यह दिन नरक चतुर्दशी का दिन था

Hanuman Jayanti 2020

हनुमान जयंती 2020

7 April 2020 को 12:02:47 से पूर्णिमा आरम्भ
8 April 2020 को 08:06:17 पर पूर्णिमा समाप्त
हनुमान जयंती 2020 तारीख व मुहूर्त हनुमान जयंती भगवान हनुमानजी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है इस दिन भक्तगण बजरंग बली के नाम का व्रत रखती है प्रत्यक वर्ष हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा की मनाया जाता है हलाकि कई स्थानों में यह कार्तिक मास के क्रष्ण पक्ष के 14 वे  दिन भी मनाई जारी है

हनुमान जयंती व्रत एव पूजा विधि

जाने हनुमान जयंती पूजा विधि और व्रत विधि

  • इस दिन तात्कालिक तिथि (राष्ट्रव्यापिनी) को लिया जाता है
  • व्रत की पूर्व रात्रि को ज़मीन पर सोने से पहले भगवान राम और माता सीता के साथ साथ हनुमान जी स्मरण करे
  • प्रात: जल्दी उठकर दोबारा राम सीता एव हनुमान जी को याद करे
  • जल्दी सबेरे स्नान ध्यान करे
  • अब हाथ में गंगा जल लेकर व्रत का संकल्प करे
  • इसके बाद पूर्व की और भगवान हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित करे
  • अब विनम्र भाव से बजरंग बली की पार्थना करे
  • आगे षोडशोपचार की विधि विधान से श्री श्री हनुमानजी की आराधना करे

हनुमान जयंती व्रत विधि

इस दिन व्रत रखने वालों को कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है| व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि से ब्रह्मचर्य का पालन करें| हो सके तो ज़मीन पर ही सोए इससे अधिक लाभ होगा| प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर प्रभू श्री राम, माता सीता व श्री हनुमान का स्मरण करें| तद्पश्चात नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान कर हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा करें| इसके बाद हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करें| फिर हनुमान जी की आरती उतारें| इस दिन स्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का अखंड पाठ भी करवाया जाता है| प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने चने एवं बेसन के लड्डू हनुमान जी को चढ़ाये जाते हैं| पूजा सामग्री में सिंदूर, केसर युक्त चंदन, धूप, अगरबती, दीपक के लिए शुद्ध घी या चमेली के तेल का उपयोग कर सकते हैं|पूजन में पुष्प के रूप में गैंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीला पुष्प अर्पित करें| इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाने से मनोकामना की शीघ्र पूर्ति होती है|

Hanuman Jayanti 2020

पोराणिक कथा

पोराणिक कथा के अनुसार अजना एक अप्सरा थी हालाँकि उन्होंने सराफ के करण उसने प्रथ्वी पर जन्म लिया और यह सराफ उनपर तभी हट सकता था जब वे एक सन्तान को जन्म देतीं है वाल्मीकि रामायण के अनुसार केसरी श्री हनुमन जी के पिता थे वे सुमेरु के राजा थे और केसरी ब्रहस्पति के पुत्र थे अनजा ने सन्तान प्राप्ति के लिए 12 वर्षो की भगवान शिव की घोर तपस्या की और परिणम स्वरूप उन्होंने सन्तान के रूप में हनुमानजी को प्राप्त किया ऐसा माना जाता है की हनुमानजी भगवान शिव के ही अवतार है की

संकट मोचन हनुमान जी की जन्म कथा

हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार माने जाते हैं| उनके जन्म के बारे में पुराणों में जो उल्लेख मिलता है उसके अनुसार अमरत्व की प्राप्ति के लिये जब देवताओं व असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया को उससे निकले अमृत को असुरों ने छीन लिया और आपस में ही लड़ने लगे। तब भगवान विष्णु मोहिनी के भेष अवतरित हुए। मोहनी रूप देख देवता व असुर तो क्या स्वयं भगवान शिवजी कामातुर हो गए। इस समय भगवान शिव ने जो वीर्य त्याग किया उसे पवनदेव ने वानरराज केसरी की पत्नी अंजना के गर्भ में प्रविष्ट कर दिया| जिसके फलस्वरूप माता अंजना के गर्भ से केसरी नंदन मारुती संकट मोचन रामभक्त श्री हनुमान का जन्म हुआ|

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