Janmashtami 2022 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि शुभ मुहूर्त

Janmashtami 2022 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी प्रत्येक प्रत्येक वर्ष अगस्त महीने में मनाया जाता है | इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 28 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा, जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण The post Janmashtami 2022 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि शुभ मुहूर्त.
 

Janmashtami 2022 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी प्रत्येक प्रत्येक वर्ष अगस्त महीने में  मनाया जाता है | इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 28 अगस्त 2022 को मनाया जाएगा, जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है|  व्रत रखने से व्यक्ति के सभी दुखों का अंत हो जाता है जो भक्त जन्माष्टमी का व्रत रखते है| वह जन्माष्टमी के एक दिन पहले केवल एक ही समय भोजन करते है| पौराणिक गंथो और शास्त्रों के अनुसार “श्रीकृष्ण का जन्मा भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी” को रोहिणी अक्षत्र में मध्य रात्रि के समय हुआ था| भाद्रपद महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यदि रोहिणी अक्षत्र का भी संयोग हो तो वह और भी भाग्यशाली मन जाता है|

Janmashtami 2021 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि शुभ मुहूर्त

Krishna Janmashtami Date and Auspicious Time

कृष्ण जन्माष्टमी 2022

निशीथ पूजा मुहूर्त :24:03:00 से 24:46:42 तक
अवधि :0 घंटे 43 मिनट
जन्माष्टमी पारणा मुहूर्त :05:52:03 के बाद 20, अगस्त को

Janmashtami 2021 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि शुभ मुहूर्त

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि 2022

Krishna Janmashtami Puja Vidhi 2022

  • श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद सभी देवताओं के नमस्कार करें|.
  • और पूर्व या उतर को मुख करके बैठे हाथ में जल फल और पुष्प को लेकर संकल्प करें|.
  • मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल स्नान करने के लिए देवकी जी के लिए प्रस्तुति ग्रह बनाए|.
  • अब सूतिका ग्रह में सुंदर बी बिछाने बिछा कर उस पर शुभ कलश की स्थापना करे|.
  • इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या चित्र का स्थापना करें|.
  • पूजा में देवकी वासुदेव बलराम नन्द यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम लेते हुए विधिवत पूजा करे|.
  • यह व्रत रात्रि बारह बजे के बाद खोला जाता है|.
  • इस व्रत में अनाज नही खाया जाता है फलाहर के रूप में कुट्टू के आते की पकोड़ी मावे की बर्फी और सिघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है|.

Janmashtami 2021 Date And Timing Puja Vidhi श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि शुभ मुहूर्त

Janmashtami Fast Story

जन्माष्टमी व्रत कथा : स्‍कंद पुराण के मुताबिक द्वापर युग की बात है। तब मथुरा में उग्रसेन नाम के एक प्रतापी राजा हुए। लेकिन स्‍वभाव से सीधे-साधे होने के कारण उनके पुत्र कंस ने ही उनका राज्‍य हड़प लिया और स्‍वयं मथुरा का राजा बन बैठा। कंस की एक बहन थी, जिनका नाम था देवकी। कंस उनसे बहुत प्रेम करता था। देवकी का विवाह वसुदेव से तय हुआ तो विवाह संपन्‍न होने के बाद कंस स्‍वयं ही रथ हांकते हुए बहन को ससुराल छोड़ने के लिए रवाना हुआ। जब वह बहन को छोड़ने के लिए जा रहे थे, तभी एक आकाशवाणी हुई कि देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान कंस की मृत्यु का कारण बनेगी। यह सुनते ही कंस क्रोधित हो गया, और देवकी और वसुदेव को मारने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा तभी वसुदेव ने कहा कि वह देवकी को कोई नुकसान न पहुंचाए। वह स्‍वयं ही देवकी की आठवीं संतान कंस को सौंप देगा। इसके बाद कंस ने वसुदेव और देवकी को मारने के बजाए कारागार में डाल दिया।

कारागार में ही देवकी ने सात संतानों को जन्‍म दिया, और कंस ने सभी को एक-एक करके मार दिया। इसके बाद जैसे ही देवकी फिर से गर्भवती हुईं तभी कंस ने कारागार का पहरा और भी कड़ा कर दिया। तब भाद्रपद माह के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को रोहिणी नक्षत्र में कन्‍हैया का जन्‍म हुआ। तभी श्री विष्‍णु ने वसुदेव को दर्शन देकर कहा कि वह स्‍वयं ही उनके पुत्र के रूप में जन्‍में हैं। उन्‍होंने यह भी कहा कि वसुदेव जी उन्‍हें वृंदावन में अपने मित्र नंदबाबा के घर पर छोड़ आएं, और यशोदा जी के गर्भ से जिस कन्‍या का जन्‍म हुआ है, उसे कारागार में ले आएं। यशोदा जी के गर्भ से जन्‍मी कन्‍या कोई और नहीं बल्कि स्‍वयं माया थी। यह सबकुछ सुनने के बाद वसुदेव जी ने वैसा ही किया।

स्‍कंद पुराण के मुताबिक जब कंस को देवकी की आठवीं संतान के बारे में पता चला तो वह कारागार पहुंचा। वहां उसने देखा कि आठवीं संतान तो कन्‍या है, फिर भी वह उसे जमीन पर पटकने ही लगा कि वह मायारूपी कन्‍या आसमान में पहुंचकर बोली कि रे मूर्ख मुझे मारने से कुछ नहीं होगा। तेरा काल तो पहले से ही वृंदावन पहुंच चुका है, और वह जल्‍दी ही तेरा अंत करेगा। इसके बाद कंस ने वृंदावन में जन्‍में नवजातों का पता लगाया। जब यशोदा के लाला का पता चला तो उसे मारने के लिए कई प्रयास किए। कई राक्षसों को भी भेजा लेकिन कोई भी उस बालक का बाल भी बांका नहीं कर पाया, तो कंस को यह अहसास हो गया कि नंदबाबा का बालक ही वसुदेव-देवकी की आठवीं संतान है। कृष्‍ण ने युवावस्‍था में कंस का अंत किया।

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