Mahalakshmi Vart 2022 Shubh Muhoort Date End Time

Mahalakshmi Vrat 2022 Shubh Muhoort Date End Time : महालक्ष्मी व्रत 2022 प्रत्यक वर्ष किया जाता है महालक्ष्मी व्रत महालक्ष्मी व्रत गणेश चतुर्थी के चार दिन पश्चात आता है महालक्ष्मी व्रत निरंतर सोलह दिनों तक The post Mahalakshmi Vart 2022 Shubh Muhoort Date End Time.
 

Mahalakshmi Vrat 2022 Shubh Muhoort Date End Time : महालक्ष्मी व्रत 2022 प्रत्यक वर्ष किया जाता है महालक्ष्मी व्रत महालक्ष्मी व्रत गणेश चतुर्थी के चार दिन पश्चात आता है महालक्ष्मी व्रत निरंतर सोलह दिनों तक किया जाता है| और महालक्ष्मी व्रत भारत में बड़ी धूम धाम से किया जाता है हम आपके लिए लेकर आयें है Mahalakshmi, Mahalakshmi Shubh Muhoort, Mahalakshmi Shubh Muhoort, Mahalakshmi Dinaank end Taim, Mahalakshmi Vart 2022, Mahalakshmi Vart Date And Time, Mahalakshmi Shubh Mhurt,

Mahalakshmi Vart 2020 Shubh Muhoort Date End Time

Mahalakshmi Shubh Muhoort

महालक्ष्मी पूजन शुभ मुहूर्त 2022
महालक्ष्मी व्रत मंगलवार :- 12 August 2022
चंद्रोदय समय :- 12:22 PM
महालक्ष्मी व्रत प्रारम्भ मंगलवार :- august 2022
महालक्ष्मी व्रत पूर्ण ब्रहस्पतिवार :-Stumber 2022
अष्टमी तिथि प्रारम्भ :- august 2022 को 12:21 PM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त :-  august 2022 को 10: 39 AM

Mahaalakshmee Vrat 2022

महालक्ष्मी व्रत प्रत्यक वर्ष आता है| महालक्ष्मी व्रत प्रत्यक वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल अष्टमी से प्रारम्भ होता है| महालक्ष्मी व्रत गणेश चतुर्थी के चार दिन पश्चात आता है| महालक्ष्मी व्रत निरंतर सोलह दिनों तक किया जाता है| या मनाया जाता है, उत्तर भारत में अनुसरित पूर्णिमान्त कैलेण्डर के अनुसार इस व्रत का समापन आश्विन माह की कृष्ण अष्टमी को होता है| तिथियों के घटने-बढ़ने के आधार पर उपवास की अवधि पन्द्रह दिन अथवा सत्रह हो सकती है| इस व्रत का पालन धन व समृद्धि की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये किया जाता है| भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को देवी राधा की जयन्ती के रूप में भी मनाया जाता है| देवी राधा जयन्ती को राधा अष्टमी के नाम से जाना जाता है| जिस दिन महालक्ष्मी व्रत आरम्भ होता है| वह दिन अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है| क्योंकि इस दिन दूर्वा अष्टमी व्रत भी होता है| दूर्वा अष्टमी पर दूर्वा घास की पूजा की जाती है| इस दिन को ज्येष्ठ देवी पूजा के रूप में भी मनाया जाता है| जिसके अन्तर्गत निरन्तर त्रिदिवसीय देवी पूजन किया जाता है|

Mahalakshmi Vart 2020 Shubh Muhoort Date End Time

Sri Mahalakshmi Vrat Pujan 2022

महालक्ष्मी व्रत पूजन :- Mahalakshmi Vrat Pujan के लिए सबसे पहले प्रात:काल में स्नान आदि कार्यो से निवृत होकर, व्रत का संकल्प लिया जाता है.
व्रत का संकल्प लेते समय निम्न मंत्र का उच्चारण किया जाता है.

करिष्यsहं महालक्ष्मि व्रतमें त्वत्परायणा ।
तदविध्नेन में यातु समप्तिं स्वत्प्रसादत: ।।

हाथ की कलाई में बना हुआ डोरा बांधा जाता है| जिसमें 16 गांठे लगी होनी चाहिए, पूजन सामग्री में चन्दन, ताल, पत्र, पुष्प माला, अक्षत, दूर्वा, लाल सूत, सुपारी, नारियल तथा नाना प्रकार के भोग रखे जाते है| नये सूत 16-16 की संख्या में 16 बार रखा जाता है| इसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण किया जाता है| व्रत पूरा हो जाने पर वस्त्र से एक मंडप बनाया जाता है| उसमें लक्ष्मी जी की प्रतिमा रखी जाती है| श्री लक्ष्मी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है| और फिर उसका सोलह प्रकार से पूजन किया जाता है| इसके पश्चात ब्रह्माणों को भोजन कराया जाता है| और दान- दक्षिणा दी जाती है
इसके बाद चार ब्राह्माण और 16 ब्राह्माणियों को भोजन करना चाहिए| इस प्रकार यह व्रत पूरा होता है| इस प्रकार जो इस व्रत को करता है उसे अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति होती है| सोलहवें दिन इस व्रत का उद्धयापन किया जाता है| जो व्यक्ति किसी कारण से इस व्रत को 16 दिनों तक न कर पायें, वह तीन दिन तक भी इस व्रत को कर सकता है| व्रत के तीन दोनों में प्रथम दिन, व्रत का आंठवा दिन एवं व्रत के सोलहवें दिन का प्रयोग किया जा सकता है| इस व्रत को लगातार सोलह वर्षों तक करने से विशेष शुभ फल प्राप्त होते हैं| इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए. केवल फल, दूध, मिठाई का सेवन किया जा सकता है|

Mahalakshmi Vrat Katha 2022

प्राचीन समय की बात है, कि एक बार एक गांव में एक गरीब ब्राह्माण रहता था| वह ब्राह्माण नियमित रुप से श्री विष्णु का पूजन किया करता था| उसकी पूजा-भक्ति से प्रसन्न होकर उसे भगवान श्री विष्णु ने दर्शन दिये़. और ब्राह्माण से अपनी मनोकामना मांगने के लिये कहा, ब्राह्माण ने लक्ष्मी जी का निवास अपने घर में होने की इच्छा जाहिर करे. यह सुनकर श्री विष्णु जी ने लक्ष्मी जी की प्राप्ति का मार्ग ब्राह्माण को बता दिया, मंदिर के सामने एक स्त्री आती है|जो यहां आकर उपले थापती है| तुम उसे अपने घर आने का आमंत्रण देना. वह स्त्री ही देवी लक्ष्मी है| देवी लक्ष्मी जी के तुम्हारे घर आने के बार तुम्हारा घर धन और धान्य से भर जायेगा| यह कहकर श्री विष्णु जी चले गये. अगले दिन वह सुबह चार बचाए ही वह मंदिर के सामने बैठ गया| लक्ष्मी जी उपले थापने के लिये आईं, तो ब्राह्माण ने उनसे अपने घर आने का निवेदन किया| ब्राह्माण की बात सुनकर लक्ष्मी जी समझ गई, कि यह सब विष्णु जी के कहने से हुआ है| लक्ष्मी जी ने ब्राह्माण से कहा की तुम महालक्ष्मी व्रत करो, 16 दिनों तक व्रत करने और सोलहवें दिन रात्रि को चन्द्रमा को अर्ध्य देने से तुम्हारा मनोरथ पूरा होगा| ब्राह्माण ने देवी के कहे अनुसार व्रत और पूजन किया और देवी को उत्तर दिशा की ओर मुंह करके पुकारा, लक्ष्मी जी ने अपना वचन पूरा किया| उस दिन से यह व्रत इस दिन, उपरोक्त विधि से पूरी श्रद्वा से किया जाता है|

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