Nag Panchami 2022 शुभ महूर्त, पूजा विधि जानिए कैसे मनाते नागपंचमी

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Nag Panchami 2021 शुभ महूर्त, पूजा विधि जानिए कैसे मनाते नागपंचमी

Neg Panchami Shubh Muhurat

 नागपंचमी पूजा मुहूर्त– सुबह 5 बज कर 48 मिनट से 8 बज कर 27 मिनट तक (2 अगस्त 2022)

Nag Panchami 2021 शुभ महूर्त, पूजा विधि जानिए कैसे मनाते नागपंचमी

 Naag Panchami Ki Puja Vidhi, नागपंचमी पूजा विधि

1 : नागपंचमी के दिन घर की अच्छी तरह से सफाई करके नहाकर साफ वस्त्र धारण करें।.
2 : इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर दोनों और सांप की आकृति बनाएं।.
3 : इसके बाद पूजा स्थल या फिर एक चौकी पर कपड़ा बिछा कर नाग देवता की प्रतिमा स्थापित करके उनका दूध से अभिषेक करें।.
4 : इसके बाद नाग देवता को पुष्प , नैवेद्य, चंदन, तांबूल आदि अन्य चीजें अर्पित करके उनकी विधिवत पूजा करें और नागपंचमी की कथा सुने|.
5 : अंत में धूप व दीप से नाग देवता की आरती उतारें और किसी सांप को इस दिन दूध अवश्य पिलाएं।.

Nag Panchami 2021 शुभ महूर्त, पूजा विधि जानिए कैसे मनाते नागपंचमी

नागपंचमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है

नागपंचमी नागों और सर्पों की पूजा का पर्व है। हिंदू धर्म ग्रन्थों में नाग को देवता माना गया है| इसके पीछे कई मान्यताएं हैं जैसे कि शेषनाग के फन पर यह पृथ्वी टिकी है। भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शैय्या पर सोते हैं। भोलेनाथ के गले में सर्पों का हार है और भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर नाग की सहायता से ही वासुदेव जी ने यमुना नदी पार की थी। यही नहीं समुद्र मंथन के समय देवताओं की मदद भी वासुकी नाग ने ही की थी। इसीलिए नागपंचमी के दिन नाग देवता का आभार व्यक्त किया जाता है। एक अन्य कारण यह भी है कि बारिश के मौसम में सांपों के बिलों में पानी ज्यादा भर जाने से वो बिल छोड़कर अन्य सुरक्षित स्थान की खोज में निकलते हैं। उनकी रक्षा और सर्पदंश के भय से मुक्ति पाने के लिए भारतीय संस्कृति में नागपंचमी के दिन नाग के पूजन की परंपरा शुरू हुई।

प्राचीन काल से हमारे भारत देश में मनाए जाने वाले पर्व और उत्सवों को धर्म से जोड़ा गया है, जहां ये एक तरफ धार्मिक आस्था को बढ़ावा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ये व्यक्ति और समाज को प्रकृति से जोड़ने का कार्य भी करते हैं। सावन माह की पंचमी तिथि में मनाया जाने वाला नागपंचमी का त्योहार भी इंसान को पर्यावरण में मौजूद जीव- जंतु की रक्षा करने का संदेश देता है। आज भी मेडिकल साइंस बहुत हद तक दवाइयों के निर्माण के लिये सांपों और नागों से प्राप्त होने वाले विष पर निर्भर है। इनके जहर की थोड़ी- सी मात्रा अनेक लोगों का जीवन बचाने में उपयोगी है। वहीं दूसरी तरफ कृषि प्रधान वाले देश में बरसात के मौसम में धान की फसल तैयार की जाती है। इन धान के पौधों को चूहे काट कर नष्ट कर देते हैं। सांपों द्वारा चूहों का भक्षण एक संतुलन उत्पन्न करता है। इस पारिस्थितिकीय उपयोगिता के कारण ही प्राचीन काल से नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है ताकि नागों और सर्पों की रक्षा हो और व्यक्ति भी उनके दंश से बचा रहे।

Nag Panchami 2021 शुभ महूर्त, पूजा विधि जानिए कैसे मनाते नागपंचमी

Naag Panchami Ka Mantra नागपंचमी के मंत्र

ॐ भुजंगेशाय विद्महे,
सर्पराजाय धीमहि,
तन्नो नाग: प्रचोदयात्।।

सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।।

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:।
ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।।’

अनंत वासुकी शेषं पद्मनाभं च मंगलम्शं
खपालं ध्रतराष्ट्रकंच तक्षकं कालियं तथा।

ॐ हँ जू स: श्री नागदेवतायेनमोनम:||

ॐ श्री भीलट देवाय नम:

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Naag Devta Ki Aarti – नाग देवता की आरती

आरती कीजे श्री नाग देवता की ,भूमि का भार वहनकर्ता की

उग्र रूप है तुम्हारा देवा भक्त,सभी करते है सेवा

मनोकामना पूरण करते ,तन-मन से जो सेवा करते

आरती कीजे श्री नाग देवता की ,भूमि का भार वहनकर्ता की

भक्तो के संकट हारी की आरती कीजे श्री नागदेवता की

आरती कीजे श्री नाग देवता की ,भूमि का भार वहनकर्ता की

महादेव के गले की शोभा ग्राम देवता मै है पूजा

श्ररेत वर्ण है तुम्हारी धव्जा

दास ऊकार पर रहती क्रपा सहसत्रफनधारी की|

आरती कीजे श्री नाग देवता की ,भूमि का भार वहनकर्ता की

आरती कीजे श्री नाग देवता की ,भूमि का भार वहनकर्ता की

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