Rama Ekadashi 2020 Vrat Shubh Muhurat Date And Lakshmi Ji Puja

Rama Ekadashi 2020 Vrat Shubh Muhurat Date And Lakshmi Puja, Rama Ekadashi Vrat 2020, Rama Ekadashi Date, Rama Ekadashi Muhurat, Bhagavaan Vishnu Vrat, Rama Ekadashi Lakshmi Vrat: Rama Ekadashi रमा एकादशी व्रत, रमा एकादशी का व्रत ही नही बल्कि प्रत्येक महीने में आने वालें व्रतों में रमा एकादशी का व्रत भी महत्वपूर्ण माना गया है| रमा एकादशी व्रत ”कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी” को व्रत किया जाता है| इस वर्ष यह रमा एकादशी का व्रत 23 नवम्बर 2020 को किया जाएगा|.

Nirjala Ekadashi Vrat Katha

Rama Ekadashi Vrat and Lakshmi Ji Puja

दीपावली के चार दिन पहले आने वाली इस एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है| इसके प्रभाव से ब्रहा हत्या जेसे महापाप भी दूर हो जाते है|रमा एकादशी व्रत प्रत्येक वर्ष किया जाने वाला व्रत है| यह व्रत महिलायों द्वारा किया जाता है| रमा एकादशी व्रत इच्छुक महिलाए इसका उपवास रखती है| यह व्रत कार्तिक का महिना में किया जाता है| क्युकी कार्तिक का महिना भगवान विष्णु को समर्पित होता है| हालाँकि भगवान विष्णु इस समय शयन कर रहे होते है| और कार्तिक शुक्ल एकादशी को ही वे चार मास बाद जागते है|.

कृष्ण पक्ष में जितने भी त्यौहार आते है| उनका संबंध किसी न किसी तरीके से माता लक्ष्मी से भी होता है| दीपावली पर तो विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन तक किया जाता है| इसलिए माता लक्ष्मी की आराधना कार्तिक कर्षण एकादशी से ही उनके उपवास से आरंभ हो जाते है| तथा माता लक्ष्मी जी को रमा के नाम से भी जाना जाता है| इस लिए इस एकादशी को रमा एकादशी भी कहा जाता है|.

Rama Ekadashi Vrat Pooja Vidhi

  • रमा एकादशी व्रत एव पूजा विधि – रमा एकादशी व्रत ही नही बल्कि भारत में अनेक प्रकार के व्रत आते है और उनके करने की विधि भी अलग अलग होती है| और सभी व्रतों का उपवास विधि विधान से किया जाता है|
  • रमा एकादशी का व्रत दशमी की संध्या से ही आरंभ हो जाता है| दशमी के दिन सूर्यास्त से पहले ही भोजन ग्रहण कर लेना चाहिए|.
  • इसके बाद एकादशी के दिन प्रात काल उठकर स्नान आदि कर स्वच्छ होना चाहिए|.
  • इस दिन भगवान विष्णु के पूर्णावतार भगवान श्री कृष्ण की विधिवत धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प एवं फलों से पूजा की जाती है|.
  • इस दिन तुलसी पूजन करना भी शुभ माना जाता है|.
  • इस दिन पूरी श्रद्धा एवं भक्ति से किये उपवास पुण्य चिरस्थायी होता है|.
  • तथा भगवान भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं|.

Rama Ekadashi Vrat Date And Shubh Muhoort

भारत में व्रत ही नही बल्कि किसी भी कार्य को करने से पहले शुभ समय और सुभमहूर्त के अनुसार किया जाता है| तथा भारत में आने वाले सम्पूर्ण त्यौहार दिवस व्रत आदि को भी शुभ मुहूर्त व समय अनुसार किया जाता है| जिसमे रमा एकादशी का व्रत भी समय अनुसार कर सकते है| जो इस प्रकार से है|

रमा एकादशी तिथि – 23 नवम्बरः 2019
पारण का समय – प्रात: 06:32 बजे से 08:45 बजे तक (25 अक्टूबर 2019)
एकादशी तिथि आरंभ – 01:09 बजे (24 अक्टूबर 2019)
एकादशी तिथि समाप्त – 22:19 बजे (24 अक्टूबर 2019)

Ekadashi Pauraanik Katha

एकादशी पौराणिक कथा : युद्धिष्ठर की जिज्ञासा को शांत करते हुए भगवान श्री कृष्ण रमा एकादशी की कथा कहते हैं| बहुत समय पहले की बात है| एक मुचुकुंद नाम के राजा हुआ करते थे| बहुत ही नेमी-धर्मी राजा थे| और भगवान विष्णु के भक्त भी| उनकी एक कन्या भी थी जिसका नाम था चंद्रभागा| चंद्रभागा का विवाह हुआ चंद्रसेन के पुत्र शोभन से| कार्तिक मास की दशमी की बात है| कि शोभन अपनी ससुराल आये हुए थे| संध्याकाल में राजा ने मुनादी करवादी कि एकादशी को राज्य में उपवास किया जायेगा| कोई भी भोजन ग्रहण न करे| अब शोभन के लिये यह बड़ी मुश्किल की घड़ी थी क्योंकि शोभन ने कभी उपवास किया ही नहीं था दूसरा उससे भूख सहन नहीं होती थी|.

उसने अपनी समस्या को चंद्रभागा के सामने रखा तो उसने कहा कि हमारे राज्य में मनुष्य तो क्या पालतु जीव जंतुओं तक भोजन ग्रहण करने की अनुमति नहीं होती| तब विवश होकर शोभन उपवास के लिये तैयार हो गया लेकिन पारण के दिन का सूर्योदय वह नहीं देख पाया और उसने प्राण त्याग दिये| राजसी सम्मान के साथ उसका संस्कार किया गया लेकिन चंद्रभागा ने उसके साथ स्वयं का दाह नहीं किया और अपने पिता के यहां ही रहने लगी| उधर एकादशी के व्रत के पुण्य से शोभन को मंदरांचल पर्वत पर कुबेर जैसा आलिशान और दिव्य राज्य प्राप्त हुआ|.

एक बार मुचुकुंदपुर के विप्र सोम तीर्थ यात्रा करते-करते उस दिव्य नगर में जा पंहुचे| उन्होंने सिंहासन पर विराजमान शोभन को देखते ही पहचान लिया| फिर क्या था वे उनके सामने जा पंहुचे उधर ब्राह्मण को आता देख उनके सम्मान में शोभन भी सिंहासन से उठ खड़ा हुआ| उन्हें पहचान कर शोभन ने चंद्रभागा और अपने ससुर व राज्य की कुशलक्षेम पूछी| इसके बाद सोम ने जिज्ञासा प्रकट की कि यह सब कैसे संभव हुआ तब शोभन ने रमा एकादशी के प्रताप का बखान किया लेकिन चिंता प्रकट की कि मैने विवशतावश यह उपवास किया था|.

इसलिये मुझे शंका है कि यह सब स्थिर नहीं है| आप यह वृतांत चंद्रभागा के सामने जरूर कहना| अपनी तीर्थ यात्रा से लौटने के बाद सोम सीधे चंद्रभागा से मिलने पंहुचे और सारा हाल कह सुनाया| चंद्रभागा बहुत खुश हुई और जल्द ही अपने पति के पास जाने का उपाय जानने लगी| सोम उसे वाम ऋषि के आश्रम ले गये वहां महर्षि के मंत्र और चंद्रभागा द्वारा किये गये एकादशी व्रत के पुण्य से वह दिव्यात्मा हो गई और मंदरांचल पर्वत पर अपने पति के पास जा पंहुची और अपने एकादशी व्रतों के पुण्य का फल शोभन को देते हुए उसके सिंहासन व राज्य को चिरकाल के लिये स्थिर कर दिया और स्वयं भी शोभन के वामांग विराजी|.

Rama Ekadashi Vrat Shayari In Hindi

रमा एकादशी के शुभ अवसर पर
भगवान विष्णु आपके सभी पाप नष्ट करें।
शुभ निर्जला एकादशी!

Rama Ekadashi Facebook Shayari

रमा एकादशीच्या पावन पर्व वर
भगवान विष्णू च्या कृपेने
तुमच्या सर्व पाप नष्ट होऊ या

Rama Ekadashi Whatsapps

रमा एकादशी के पवित्र त्यौहार
पर भगवान विष्णु जी की कृपा आप पर बने रहे!

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