Rama Navami 2 April 2020 रामनवमी शुभ मुहूर्त, महत्व पूजा विधि भगवान राम की कथा

रामनवमी का शुभ मुहूर्त पूजा 2020

रामनवमी दिनांक  :- 2 अप्रैल 2020
रामनवमी मुहूर्त:- 11:09:46 से 13:39:50 तक
अवधि:- 2घंटा 30 मिनट
रामनवमी मध्याह समय :- 12:24:48

Ram Navami 2020

राम नवमी कब है

आईए हम जानते है की रामनवमी कब है. रामनवमी 2 अप्रैल 2020 की तारीख भगवान राम के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में रामनवमी मनाई जाती है. जो भगवान विष्णु के 7 वें अवतार थे प्रत्येक साल हिन्दू केलेंदर के अनुसार चैत्र मास की नवमी तिथि को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है. चैत्र मास की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नवरात्रि भी मनाई जाती है. इस दिनों कई लोग उपवास भी रखते है यह रामनवमी राजा दशरथ की पत्नी कोशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण को परास्त करने हेतु जन्म लिया इस लिए या इस दिन से रामनवमी के रूप में यह उत्सव मनाया जाता है.

रामनवमी उत्सव 2020

रामनवी 2 April 2020 को मनाया जायेगा. श्री रामनवमी हिन्दूओं के प्रमुख त्यौहार में से एक है. जो देश दुनिया में सच्ची श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यह त्यौहार वैष्णो समुदाय में विशेष तोर पर मनाया जाता है.

1. आज के दिन भक्तगण रामायण पाठ करते है .
2. राम रक्षा स्रोत भी पढ़ते है.
3. कई जगह भजन कीर्तन का भी आयोजन किया जाता है.
4. भगवान राम की मूर्ति को फूल माला से सजाते है और स्थापित करते है.
5. भगवान राम की मूर्ति को पालने में झुलाते है.

राम नवमी  के दिन हनुमानजी की पूजा

भगवान राम की पूजा प्रत्यक दिन किया जाता है. भगवान राम की पूजा भगवान हनुमानजी के साथ में की जाती है. ऐसा मन जाता है श्री राम के बिना भगवान हनुमानजी की पूजा नही की जाती है. और श्री हनुमानजी के बिना श्री राम की पूजा नही  की जाती है. तथा दोनो की एक साथ में पूजा कि जाती है हनुमानजी भगवान राम के सबसे प्रिय भक्त माने जाते है. तथा रामनवमी का दिन श्री राम का भहुत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है इस दिन श्री राम और हनुमानजी दोनों की पूजा की जाती है तथा रामनवमी के दिन श्री राम को अधिक महत्व दिया जाता है

राम नवमी की पूजा विधि :-

1. राम नवमी की पूजा विधि कुछ इस प्रकार है
2. सबसे पहले स्नान करके पवित्र होकर पूजा स्थल पर पूजा सामग्री के साथ बैठे
3. पूजा में तुलसी पता पर कलम का फुल अवश्य होना चाहिए
4. उसके बाद श्री रामनवमी की पूजा षोडशोपचार करे
5. खीर और फल मूल को को प्रसाद के रूप में तैयार करे
6. पूजा के बाद घर की सबसे छोटी महिला सभी लोगों के माथे पर तिलक लगाए

पोराणिक मान्यताएं

श्री राम नवमी की कहानी लंकधिराज रावण से शुरू होती है. रावण अपने राज्य काल में बहुत अत्याचार करता था उसने अत्याचार से पूरी जनता त्रास्त थी यह तक की देवतागण भी क्योकि रावण ने ब्रहा जी से अमर होने का वरदान ले लिया था (कभी न मरने वाला व्यक्ति) उसके अत्याचार से तंग होकर देवतागण भगवान विष्णु के पास गए और पार्थना करने लगे फलस्वरूप      भगवान विष्णु ने प्रतापी राजा राजा दशरथ की पत्नी कोशल्या की कोख से भगवान विष्णु ने राम के रूप में रावण को परास्त करने हेतु  चेत्र की नवमी को जन्म लिया तब से चेत्र की नवमी तिथि को रामनवमी के रूप में मनाने की परम्पराओं शुरू हुई ऐसा भी कहा जाता है की नवमी के दिन ही स्वामी तुलसीदास ने रामचरित मांस की रचना शुरू की थी.

भगवान श्रीराम का जीवन परिचय

निवासस्थान :- अयोध्या, वैकुण्ठलोक (परमधाम)
अस्त्र :-  धनुष (कोदंड)
जीवनसाथी :- सीता
माता :-  (कौशल्या पुत्र भगवान राम कौशल्या के पुत्र थे) (सुमित्रा के दो पुत्र, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे) और (कैकेयी के पुत्र भरत थे)
पिता :-  दशरथ (तीन रानियां – कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी
श्रीराम के पुत्र  :-  कुश, लव
धर्म  :-  हिन्दू समाज
राजा दशरथ के तीन रानियां थीं: कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी. भगवान राम कौशल्या के पुत्र थे, सुमित्रा के दो पुत्र, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे और कैकेयी के पुत्र भरत थे. राज्य नियमों के अनुसार राजा का ज्येष्ठ पुत्र ही राजा बनने का पात्र होता है. अत: श्री राम का अयोध्या का राजा बनना निश्चित था. कैकेयी जिन्होंने दो बार राजा दशरथ की जान बचाई थी और दशरथ ने उन्हें यह वर दिया था कि वो जीवन के किसी भी पल उनसे दो वर मांग सकती हैं. राम को राजा बनते हुए और भविष्य को देखते हुए कैकेयी चाहती थी उनका पुत्र भरत ही अयोध्या का राजा बने, इसलिए उन्होंने राजा दशरथ द्वारा राम को १४ वर्ष का वनवास दिलाया और अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राज्य मांग लिया. वचनों में बंधे राजा दशरथ को विवश होकर यह स्वीकार करना पड़ा. श्री राम ने अपने पिता की आज्ञा का पालन किया. श्री राम की पत्नी देवी सीता और उनके भाई लक्ष्मण जी भी वनवास गये थे.

भगवान राम के जीवन काल के महत्वपूर्ण फोटो

राम-जन्म अकबर की रामायण से
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राम एवं सुग्रीव का मिलन।

भवानराव बाळासाहेब पंतप्रतिनिधी कृत रावण-वध।
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अयोध्या-वापसी।
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राम का राज्याभिषेक
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श्रीराम सभा
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ब्रह्मा द्वारा राम का स्वर्ग मे स्वागत
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