Rishi Panchami 2021 Date And Time Puja Vidhi | ऋषि पंचमी व्रत व्रत रखने के नियम पूजा विधि और व्रत का महत्व

Rishi Panchami 2021 Date And Time Puja Vidhi | ऋषि पंचमी व्रत व्रत रखने के नियम पूजा विधि और व्रत का महत्व : ऋषि पंचमी भारत में आने वाले त्योहारों में से ऋषि पंचमी का भी महत्व मन जाता है| यह ऋषि पंचमी का व्रत भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी को यह व्रत किया जाता है| ऋषि पंचमी का व्रत इस वर्ष 11 September 2021 को किया जाएगा| ऋषि पंचमी का व्रत केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है| ऋषि  पंचमी का व्रत मासिक धर्म में हुई गलियों के पापों के प्रायश्चिक के लिए रखा जाता है| जिसमें. Rishi Panchami 2021, Rishi Panchami 2021, Rishi Panchami Vrat 2021, Rishi Panchami fasting method, Sage panchami pooja method, How should Rishi Panchami fast, Rishi Panchami fasting rules, Sage panchami pooja method, Sage panchami pooja material, Importance of Rishi Panchami Puja, Rishi Panchami fast story, Rishi Panchami fast story According, Rishi Panchami fasting law, Rishi Panchami Date, Rishi Panchami Date and Time,

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Rishi Panchami 2021 Date And Time

Rishi Panchami 2021 Date And Time हिन्दू धर्म में कई त्यौहार आते है| उनमें से एक है ऋषि पंचमी का त्यौहार ऋषि पंचमी का व्रत भी किया जाता है| तथा यह व्रत केवल महिलाएँ की कर सकती है| Rishi Panchami का व्रत 11 September 2021 को है| यह व्रत मासिक धर्म में हुई गलतियों के पापों के प्रायश्चिक के लिए रखा जाता है| Rishi Panchami का दिन पूर्ण रूप से ऋषियों को समर्पित होता है| भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी के नाम से जानते हैं| व्रत के दृष्टिकोण से यह दिन काफी महत्वपूर्ण माना गया है| कई बार महिलाएं कुछ परेशानियों के कारण व्रत नहीं रख पाती है| ऐसे में आपको यह व्रत उद्यापन करके ही छोड़ना चाहिए, जिससे आप पाप की भागीदार न बन सकें तो चलिए जानते हैं| ऋषि पंचमी व्रत की उद्यापन विधि और इस व्रत का महत्व 2021, ऋषि पंचमी का व्रत केसे करे, ऋषि पंचमी का व्रत विधि,

Rishi Panchami 2020

Rishi Panchami 2021 Date And Shubh Muhoort

ऋषि पंचमी तिथि : प्रारम्भ 10 अगस्त शाम 7 बजकर 57 मिनट पर
ऋषि पंचमी पूजा : मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक
ऋषि पंचमी तिथि का समापन : 11 अगस्त शाम 5 बजकर 4 मिनट तक

Rishi Panchami 2021 Puja Vidhi

  •  ऋषि पंचमी व्रत करने वालों को इस दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए.
  •  आप ऋषि पंचमी व्रत की विधि किसी ब्राह्मण से करा सकती हैं या फिर स्वंय भी कर सकती हैं कथा सुन सक्ति है.
  •  Rishi Panchami के दिन सात पुरोहितों को भोजन के लिए आमंत्रित करें और सप्तऋषि मानकर उनका पूजन करें.
  •  पुरोहितों को भोजन कराने से पहले Rishi Panchami की पूजा अवश्य करें, इसके लिए पहले पूरे घर को गाय के गोबर से लिपें
  •  इसके बाद सप्तऋषि और देवी अरूंधती की प्रतिमा बनाएं और फिर कलश की स्थापना करें.
  •  कलश की स्थापना के बाद हल्दी, कुमकुम ,चदंन, पुष्प और अक्षत से पूजा करें.

Rishi Panchami Puja Mantra 2021

इस मंत्र का करें जाप
कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषय: स्मृता:।।
गृह्णन्त्वर्ध्य मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।

इस मंत्र जाप के बाद सप्तऋषियों की कथा सुने और उसके बाद सातों पुरोहितों को सप्तऋषि मानकर उन्हें भोजन कराएं. भोजन कराकर उन्हें दक्षिणा देकर उनका आर्शीवाद अवश्य लें, इसके बाद उद्यापन विधि संपन्न होने के बाद गाय को भोजन कराएं, क्योंकि गाय में सभी देवी देवताओं का वास माना जाता है.

Rishi Panchami 2020

Rishi Panchami Vrat Infrmation 2021

Rishi Panchami ऋषि पंचमी व्रत कई अन्य व्रत की तरह ही इस व्रत को महिलाओं के साथ-साथ कुंवारी कन्याएं भी रखती है| इस व्रत का अन्य उपवास की तरह महज सुहाग या मनवांछित वर पाने से संबंध या महत्व नहीं है| बल्कि इसका लाभ अलग है| तथा Rishi Panchami का व्रत मुख्य रूप से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति दिलाता है| किसी भी उम्र की महिलाएं यह व्रत रख सकती है| हालांकि इसके नियमों में रहकर ही इस व्रत को रखना उचित होता है| तथा यह Rishi Panchami का व्रत विशेष रूप से महिलाओं की मासिक माहवारी के दौरान अनजाने में हुई धार्मिेक गलतियों और उससे मिलने वाले दोषों की रक्षा के लिए यह व्रत किया जाता है| इसे इस दृष्टिकोण से बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है| Rishi Panchami के व्रत के कथा भी महिलाओं के मासिक धर्म से ही संबंधित है| इस उपवास की एक और रोचक बात यह है| कि इस व्रत में किसी भी देवी-देवता का पूजन नहीं किया जाता है| बल्कि देवी-देवताओं के स्थान पर इस दिन महिलाएं सप्तर्ष‍ियों को पूजती है| इसी कारण से इस व्रत को Rishi Panchami के नाम से जाना जाता है| बता दें कि पंचमी तिथि पांचवे दिन के साथ ही ऋषियों का भी प्रतिनिधित्व करती है|

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