Sakat Chauth Vrat Puja Vidhi 2020 Shubh Muhurat Vrat Katha In Hindi

Sakat Chauth Vrat Puja Vidhi 2020 : Sakat Chauth, Sakat Chauth Puja, Sakat Chauth Vrat Katha, Sakat Chauth Vrat Date, Sakat Chauth Vrat Shubh Muhurat, Sakat Chauth Vrat Puja Vidhi, Sakat Chauth Vrat Katha, संकष्टी चतुर्थी  हिन्दू धर्म  का सबसे प्रसिद्ध पर्व है| इस दिन भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती है| और महिलाओं द्वारा संकष्टी चतुर्थी  का उपवास रखा जाता है इस बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 अक्तूबर 2020 सोमवार को संकष्टी चतुर्थी उपवास रखा जाएगा|.

गवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवताओं में प्रथम पूजनीय माना गया है| इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता का दर्जा प्राप्त है| भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को हर लेते हैं| इसीलिए इन्हें विघ्नहर्ता और संकट मोचन भी कहा जाता है| वैसे तो हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए ढेरों व्रत-उपवास आदि किए जाते हैं। लेकिन भगवान गणेश के लिए किए Sakat Chauth 2020, Sakat Chauth Vrat, सकट चौथ व्रत 2020, Shankar Chauth Vrat Katha, Sakat Chauth Vrat Katha, Sakat Chauth Vrat Katha Hindi, Sakat Chauth Vrat Date And Time, Sakat Chauth Ki Puja,

Chauth Vrat 2020

Sankashti Chaturthi Vrat Shubh Muhoort 2020

संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा उदय होने का समय :- रात 9 बजे|.
संकष्टी चतुर्थी व्रत की शुरुआत :- 13 जनवरी की शाम 5:32 मिनट|.
संकष्टी चतुर्थी व्रत का समापन:- 14 जनवरी को दोपहर 2:49 मिनट पर|.

Sakat Chauth Vrat Ka Mahatv 2020

संकष्टी चतुर्थी या संकट चौथ का व्रत संतान की लम्बी उम्र व खुश हाल जीवन के लिए रखा जाता है| साथ ही इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है माना जाता है| की संकट चौथ का व्रत व इस दिन लंबोदर की पूजा करने से सरे संकट दूर हो जाते है| और संतान की दीर्घायु और सुखद जीवन का वरदान होता है| संकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी वक्रतुंडी चतुर्थी व (तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है)|  sakat chauth Vrat Date 2020 संकष्टी चतुर्थी का व्रत तो हर महीने में दो बार आता है| लेकिन माघ महीने में (जनवरी महीने में आने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत) आने वाला संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा सबसे ज्यादा होती है| इस दिन महिलाएँ व्रत रखती है|.

Sankashti Chaturthi Ke Important Rules

संकष्टी चतुर्थी का मतलब होता है| संकट को हरने वाली चतुर्थी संकट शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है| जिसका अर्थ होता है| कठिन समय में से मुक्ति पाना इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की आराधना करता है| पुराणों के अनुसार चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की की पूजा करना बहुत ही फलदायी होता है| इस दिन लोग सूर्योदय के समय से लेकर चंद्रमा उदय होने के समय तक उपवास रखते है| sakat chauth Vrat Date 2020 को पुरे विधि विधान से गणपति की पूजा पाठ की जाती है|.

Chauth Vrat 2020

Sankashti Chaturthi Pooja Vidhi 2020

  •   गणपति में आस्था रखने वाले लोग इस दिन उपवास रखकर उन्हें प्रसन्न के अपने मन चाहे फल की कामना करते है|.
  •  इस दिन आप प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठ जाए|.
  •  व्रत रखने वाले लोग सबसे पहले स्नान कर साफ और धुले हुए कपड़े पहन लें इस दिन लाल रंग का वस्त्र धारण करना बेहद शुभ माना जाता है| और साथ में यह भी कहा जाता है| की ऐसा करने से व्रत सफल होता है|.
  •  स्नान के बाद वे गणपति की पूजा की शुरुआत करें गणपति की पूजा करते समय जातक को अपना मुंह पूर्व या उतर दिशा की और रखना चाहिए|.
  •  सबसे पहले आप गणपति की मूर्ति को फूलों से अच्छी तरह से सज़ा लें|.
  •  पूजा में आप तील गुड लड्डू फुल ताम्बे के कलश में पानी धुप चंदन प्रसाद के तोर पर केला नारियल ले|.
  •  ध्यान रहे की पूजा के समय आप देवी दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति भी आपने पास रखे ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है|.
  •  गणपति को रोली लगाए फुल और जल अर्पित करें|.
  •  संकष्टी को भगवन गणपति को तिन के लड्डू और मोदक का भोग लगाए|.
  •  गणपति के सामने धुप दीप जला कर मन्त्र का जाप करें|.
  •  पूजा के बाद आप फल मूंगफली खीर दूध साबूदाना को छोडकर कुछ भी न खाए बहुत से लोग व्रत वाले दिन सेंधा नमक का इस्तेमाल करते है| लेकिन आप सेंधा नमक नजर अंदाज़ करने की कोशिश करे|
  •  शाम के समय चाँद के निकलने से पहले आप गनती की पूजा करें और संकष्टी व्रत कथा का पाठ करें|.
  •  पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद बाटें रात को चाँद देखने के बाद व्रत खोला जाता है और इस प्रकार संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण होता है|.

Sankashti Chaturthi Vrat Katha

संकष्टी चतुर्थी मनाने के पीछे ढेरों पौराणिक कथाओं हैं| लेकिन उन सब में जो सबसे ज्यादा प्रचलित है| हम आपको वह कथा बताने जा रहे हैं| एक बार माता पार्वती और भगवान शिव नदी के पास बैठे हुए थे| तभी अचानक माता पार्वती ने चौपड़ खेलने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की| लेकिन समस्या की बात यह थी कि वहां उन दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था| जो खेल में निर्णायक की भूमिका निभाए| इस समस्या का समाधान निकालते हुए शिव और पार्वती ने मिलकर एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी| मिट्टी से बने बालक को दोनों ने यह आदेश दिया कि तुम खेल को अच्छी तरह से देखना और यह फैसला लेना कि कौन जीता और कौन हारा|.

खेल शुरू हुआ जिसमें माता पार्वती बार-बार भगवान शिव को मात दे कर विजयी हो रही थीं| खेल चलते रहा लेकिन एक बार गलती से बालक ने माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया| बालक की इस गलती ने माता पार्वती को बहुत क्रोधित कर दिया| जिसकी वजह से गुस्से में आकर बालक को श्राप दे दिया| और वह लँगड़ा हो गया| बालक ने अपनी भूल के लिए माता से बहुत क्षमा मांगे और उसे माफ़ कर देने को कहा| बालक के बार-बार निवेदन को देखते हुए माता ने कहा कि अब श्राप वापस तो नहीं हो सकता लेकिन वह एक उपाय बता सकती हैं| जिससे वह श्राप से मुक्ति पा सकेगा|.

माता ने कहा कि संकष्टी वाले दिन पूजा करने इस जगह पर कुछ कन्याएं आती हैं| तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को सच्चे मन से करना| बालक ने व्रत की विधि को जान कर पूरी श्रद्धापूर्वक और विधि अनुसार उसे किया| उसकी सच्ची आराधना से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसकी इच्छा पूछी| बालक ने माता पार्वती और भगवान शिव के पास जाने की अपनी इच्छा को ज़ाहिर किया| गणेश ने उस बालक की मांग को पूरा कर दिया| और उसे शिव लोक पहुंचा दिया| लेकिन जब वह पहुंचा तो वहां उसे केवल भगवान शिव ही मिले| माता पार्वती भगवान शिव से नाराज़ होकर कैलाश छोड़कर चली गयी होती हैं| जब शिव ने उस बच्चे को पूछा की तुम यहाँ कैसे आए तो उसने उन्हें बताया कि गणेश की पूजा से उसे यह वरदान प्राप्त हुआ है| यह जानने के बाद भगवान शिव ने भी पार्वती को मनाने के लिए उस व्रत को किया जिसके बाद माता पार्वती भगवान शिव से प्रसन्न हो कर वापस कैलाश लौट आती हैं|.

Year 2020 Mein Aane Vaale Sankashti Chaturthi Vrat

13 जनवरी 2020 सोमवार – संकष्टी चतुर्थी|.
12 फरवरी 2020 बुधवार – संकष्टी चतुर्थी|.
12 मार्च 2020 गुरुवार – संकष्टी चतुर्थी|.
11 अप्रैल 2020 शनिवार – संकष्टी चतुर्थी|.
10 मई 2020 रविवार – संकष्टी चतुर्थी|.
8 जून 2020 सोमवार – संकष्टी चतुर्थी|.
8 जुलाई 2020 बुधवार – संकष्टी चतुर्थी|.
7 अगस्त 2020 शुक्रवार – संकष्टी चतुर्थी|.
5 सितंबर 2020 शनिवार – संकष्टी चतुर्थी|
5 अक्टूबर 2020 सोमवार – संकष्टी चतुर्थी|.
4 नवंबर 2020 बुधवार – संकष्टी चतुर्थी|.
3 दिसंबर 2020 गुरुवार – संकष्टी चतुर्थी|.

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