Vasant Panchami 2021 बसंत पंचमी शुभ मुहूर्त, सरस्वती पूजा, तथा बसंत पंचमी कामदेव पूजा

Vasant Panchami 2021. बसंत पंचमी भारत में मनाया जाने वाला पर्व है| यह भारत में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है| बसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष 16 फरवरी को मनाया जाता है| ( इस दिन सरस्वती की पूजा की जाती है| माघ महीने के पांचवें दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है|) जिससे इसे बसंत पंचमी का पर्व कहा जाता है| शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लिखित किया गया है| भारत में नया साल आने के बाद नए त्यौहार और दिवस शुरू हो जाते है| तथा नया साल अपने साथ ना सिर्फ नया जोश लाएगा|.

बल्कि हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है| इस दिन देवी माँ सरस्वती की आराधना करने का ये दिन बेहद खास होता है| इस वर्ष बसंत पंचमी साल 2020 में  16 फरवरी को पड़ रही है| इस दिन सभी स्कूल विधालयो और कॉलेज आदि में माँ सरस्वती की पूजा की जाती है|.

बसंत पंचमी 2020

Vasant Panchami Date 2020

इस साल बसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष मनाया जाने वाला त्यौहार है| यह त्यौहार प्रत्येक इस वर्ष  16 फरवरी  को मनाया  जाएगा| इस दिन देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है| भारत के साथ ही बसंत पंचमी का पर्व बांग्लादेश और नेपाल में भी बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है| इस दिन पीला रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है भारत समेत नेपाल में छ: ऋतुओं में सबसे लोकप्रिय ऋतु बसंत है| इस ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवें दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है| जिससे यह बसंत पंचमी का पर्व कहलाता है| शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लिखित किया गया है|.

बसंत पंचमी 2020

Vasant Panchami Auspicious Time 2020 ( शुभ मुहूर्त )

👉बसंत पंचमी 2021.
👉बसंत पंचमी – 16 फरवरी 2021.
👉पूजा मुहूर्त – 10:45 से 12:35 बजे तक.
👉पंचमी तिथि का आरंभ – 10:45 बजे से ( 16 फरवरी 2021 ).
👉पंचमी तिथि समाप्त – 13:18 बजे ( 17 फरवरी 2021) तक.

Importance of Basant Panchami

बसंत पंचमी का सम्बंध रामायण काल से जुड़ा है| लोक कथा के अनुसार जब सीता माँ को रावण हर कर ले गया था| तो  भगवान श्रीराम सीता माँ को खोजते हुए दंडकरण्य गए| वहाँ  शबरी नाम की दरिद्र महिला से मिले उन्होंने भगवान श्रीराम को आपने मुख से चखकर मीठे बेर खिलाए.  कहा जाता है की गुजरात के डांग जिले में आज भी वह स्थान मौजूद है| यहाँ शबीर का आश्रम भी है| पंचमी के दिन श्रीराम पधारे थे|.

बसंत पंचमी 2020

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती माँ के पूजा का महत्व

बसंत पंचमी हर वर्ष माघ महीने में शुक्ल पक्ष की पंचांग तिथि को मनाया जाता है| इ(से माघ पंचमी) भी कहते है. बसंत ऋतु में पेड़ो में नई नई कोंपलें निकलना शुरू हो जाती है| और अनेक प्रकार के मन मोहक फूलों से धरती प्राक्रतिक रूप से सज जाती है| खेतों में सरसों के पीले फूलों की चादर की बिछी होती है| और कोयल की कुक से दसों दिशाएँ गुंजायमान रहती है|.

श्रीक्रष्ण

श्रीक्रष्ण ने बसंत पंचमी के दिन कोसना वरदान दिया था जाने 

सम्पूर्ण भारत में इस तिथि को विधा और बुध की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है| पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार भगवान श्री क्रष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था| इस बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी पारंपरिक रूप से यह त्यौहार बच्चे की शिक्षा के लिए काफी शुभ माना जाता गया है| इसलिए देश के अनेक भागों में इस दिन बच्चों की पढ़ाई लिखाई का श्री गणेश किया जाता है| बच्चे को प्रथमा क्षर यानी पहला शब्द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है| आंध्र प्रदेश में इसे विधारम्भ पर्व कहते है. यहाँ के बासर सरस्वती मन्दिर में विशेष अनुष्ठान किये जाते है|.

बसंत पंचमी

बसंत पंचमी के दिन क्यों पहनते है पीले कपड़े जाने 

बसंत पंचमी के दिन नवयौवना और स्त्रियाँ पीले रंग के परिधान पहनती है| गाँवों कस्बों में पुरुष पीला पगा (पगड़ी) पहनते है| हिन्दू परम्पराओं में पीले रंगों को बहुत शुभ माना जाता है| यह समर्थित ऊर्जा और सौम्य ऊष्मा का प्रतीक भी है| इस रंग को बसंती रंग भी कहा जाता है| भारत में विवाह मुंडन आदि निमंत्रण पत्रों और पूजा के कपड़ों को पीले रंगो से रंग जाता है|

कामदेव पूजा

बसंत पंचमी के दिन कामदेव पूजा का क्या महत्व

बसंत पंचमी आमतौर पर हिन्दू धर्म में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है| इस दिन विभिन्न स्थानों पर विधा की देवी वीणा वादिनी माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है| विधार्थियों के साथ आम लोग भी माँ सरस्वती की पूजा करते है| और विधा बुद्धि और ज्ञान अर्जित करने की प्रार्थना करते हैं। लेकिन उनके साथ कामदेव की भी पूजा की जाती है| कहा जाता है की इस दिन मौसम में प्रत्येक मनुष्य के शरीर में विभिन्न तरह के बदलाव होते है| इसलिए बसंत ऋतु को खुश नमा और प्यार का मौसम भी माना जाता है|.

बसंत पंचमी के दिन क्यों बसंत पंचमी के

बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आने पर मनाई जाती है| इस दिन देवी सरस्वती और कामदेव की पूजा की जाती है| पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वसंत और कामदेव काफी घनिष्ठ मित्र थे, जिसके करण बसंत पंचमी पर कामदेव की पूजा की जाती है| आपको बता दे की बसंत पंचमी को रति काम महोत्सव भी कहा जाता है| क्यों की इस दिन कामदेव के साथ ही उनकी पत्नी रति की पूजा की जाती है|.

 मान्यताओं के अनुसार कामदेव की पूजा बसंत पंचमी के दिन कुछ लोग कामदेव की पूजा भी करते है| पुराने जमाने में राजा हाथी पर बैठकर नगर का भ्रमण करते हुए देवालय पहुँचकर कामदेव की पूजा करते थे| मान्यता है की कामदेव पूरा माहौल रूमानी कर देते है. दरअसल प्रमाणिक मान्यताओं के अनुसार बसंत कामदेव के मित्र है| इसलिए कामदेव का धनुष फूलों का बना हुआ है| जब कामदेव कमान से तीर छोड़ते है. तो उसकी आवाजें नहीं होती है. इनके बाणों का कोई कवच नहीं है. बसंत ऋतु को प्रेम की ऋतु माना जाता है| इसमें फूलों के बाणों को खाकर दिल प्रेम से सराबोर हो जाता है| इस कारणों से बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है|.

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