World Food Day 2020 Food and Agriculture Organization

World Food Day 2020 : World Food Day In Hindi, Food and Agriculture Organization, National Food Day, World Food Safety Day, विश्व खाद्य दिवस 2020 विश्व खाद्य दिवस प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है| विश्व खाद्य दिवस पुरे विश्व में प्रत्येक वर्ष 16 अक्तूबर 2020 को मनाया जाता है| विश्व खाद्य दिवस की शुरुआत 16 अक्तूबर 1945 को विश्व खाद्य दिवस मनाने की शुरुआत की थी जो आज भी जारी है| विश्व खाद्य दिवस को मनाते हुए 32 वर्ष हो चुके है| लेकिन दुनिया भर में भूखे पेट सोने वाले की संख्या में कमी नहीं आई है यह संख्या तेजी से बाढ़ती जा रही है|

World Food Day 2020

विश्व में आज भी कई लोग ऐसे है| जो भुखमरी से जूझ रहे है| इस मामले में विकासशील या विकसित देशों में किसी तरह का कोई फर्क नहीं है| विश्व की आबादी वर्ष 2050 तक नौ अरब होने का अनुमान लगाया जा रहा है| और इसमें करीब 80 फीसदी लोग विकासशील देशों में रहेंगे| ऐसे में किस तरह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाए यह एक बड़ा प्रश्न है| World Food Day In Hindi, Food and Agriculture Organization, National Food Day, World Food Safety Day, Food and Agriculture Organization, World Food Day WhatsApp Status, Food Day in India, World Hunger Day India, Food Safety Day Celebration, International Food Calendar 2020, International Food, World Food Safety Day Is Celebrated On,

Start of World Food Day

विश्व खाद्य दिवस शुरुआत: विश्व समाज के संतुलित विकास के लिए यह आवश्यक है| कि मनुष्य का सर्वांगीण विकास हो। विश्व में लोगों को संतुलित भोजन की इतनी मात्रा मिले कि वे कुपोषण के दायरे से बाहर निकल कर एक स्वस्थ जीवन जी सकें| लोगों को संतुलित भोजन मिल सके| इसके लिए आवश्यक है कि विश्व में खाद्यान्न का उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में हो| दिन पर दिन विश्व की जनसंख्या में हो रही वृद्धि और खाद्य पदार्थों के सीमित भंडार को देखते हुए खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की ज़रूरत महसूस की गई| इसे ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर 1945 को रोम में  खाद्य एवं कृषि संगठन  (एफएओ) की स्थापना की| संसार में व्याप्त भुखमरी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने एवं इसे खत्म करने के लिए 1980 से 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस का आयोजन शुरू किया गया|

World Food Day Begins The Reason for increasing starvation in the world

दुनिया भर में भूखे पेट सोने वालों की संख्या तेज़ी से बढती जा रही है| संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार 2002 की तुलना में खाद्यान्नों की कीमतों में 140 प्रति शत की भारी भरकम वृद्धि हुई है| इसकी वजह से दिसम्बर 2007 से 40 देशों को खाद्यान्न संकट का सामना करना पड़ रहा है| हैती और मैक्सिको में लाखों लोग इसके ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आए| वहीं कई देशों में दंगे और लूटपाट की घटनाएँ भी हुई| संयुक्त राष्ट्र संघ ने इन देशों में खाद्य संकट के कारण सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल यानी युद्ध जैसी स्थिति पैदा होने की चेतावनी दी है|  इंडोनेशिया आइवरी कोस्ट, सेनेगल, फिलिपींस, मोरोक्को जैसे देशों में स्थिति ख़राब है| एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में भी दाल, खाद्य तेल और चीनी की भारी कमी 2011 के बाद पैदा हो जायेगी| अर्जुन सेन गुप्ता कमिटी के अनुसार देश में 77 प्रति शत फीसदी लोग 20 रुपये रोजाना से कम में अपना गुज़ारा करते हैं| सोचा जा सकता है| की 15 रुपये किलो आटा और 18 रुपये किलो चावल भी इस तबके के लिए काफ़ी महंगा है|

जहाँ एक तरफ़ स्थिति इतनी भयंकर है| वहीं कुछ तथ्य भुखमरी को मुँह चिड़ाते नज़र आते हैं| गार्जियन’ में छपी विश्व बैंक की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार अमीर देशों द्वारा जैव ईधन के इस्तेमाल से खाद्य के दामों में 75 फीसदी की वृद्धि हुई है| मक्का से एथेनोल बनाने वाले अमेरिका ने पिछले तीन साल के दौरान दुनिया के कुल मक्का उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा हड़प कर लिया| कनाडा में कीमत कम होने की वजह से 1,50,000 सूअरों को मारने पर 5 करोड़ डॉलर खर्च किए गए| भारत की सरकारी व्यवस्था भी पीछे नहीं है| भारतीय खाद्य निगम ने माना है की उसके गोदामों में हर साल 50 करोड़ रुपये का 10.40 लाख मीट्रिक तन अनाज ख़राब हो जाता है| यह अनाज हर साल सवा करोड़ लोगों की भूख मिटा सकता है| दुनिया में खाने-पीने की कमी नहीं बल्कि उनके सही बँटवारे की कमी है|

Malnutrition problem in India

  • स्वस्थ आहार भोजन और पोषण आपूर्ति हेतु एक आवश्यक तत्त्व है|.
  • भारत में पिछले कुछ सालों में काफी हद तक खाद्य उपभोग के पैटर्न में बदलाव आया है| जहाँ पहले खाद्य उपभोग में
  • विविधता के लिये पारंपरिक अनाज (ज्वार, जौ, बाजरा आदि) उपयोग में लाया जाता था, वहीँ वर्तमान में इनका उपभोग कम हो गया है|.
  • पारंपरिक अनाज, फल और अन्य सब्जियों के उत्पादन में कमी के कारण इनकी खपत भी कम हुई जिससे खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रभावित हुई|.
  • हालाँकि आज़ादी के बाद से खाद्यान्न उत्पादन में 5 गुना बढ़ोतरी हुई है। लेकिन कुपोषण का मुद्दा अभी भी चुनौती बना हुआ है|.
  • भारत में भुखमरी की समस्या वास्तव में खाद्य की उपलब्धता न होने के कारण ही नहीं बल्कि देश में मांग और आपूर्ति के बीच अंतराल भी एक मुख्य समस्या है|.
  • जनसंख्या के कुछ वर्गों की खरीद क्षमता में कमी भी एक प्रमुख समस्या है क्योंकि ये वर्ग पोषक खाद्य पदार्थों जैसे- दूध, फल, मांस, मछली, अंडा आदि खरीदने में समर्थ नहीं हैं|.

Changes in food safety In India

1974 के विश्व खाद्य सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा के विचार की शुरूआत हुई| इसके पूर्व खाद्य सुरक्षा उस स्थिति को समझा जाता था| जब राज्य खाद्य उपभोग के लिए स्वयं को उस स्थिति में ले आए जहाँ खाद्य के मूल्यों व उपभोग में आए उतार चढ़ाव में भी खुद को संतुलित रख सकें| 1996 में एफएओ ने खाद्य सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा की परिभाषा कुछ इस प्रकार दी| खाद्य सुरक्षा का तात्पर्य उस स्थिति से है|  जबकि विश्व के समस्त लोग हर वक्त शारीरिक व मानसिक रूप से इस स्थिति में हों की वह स्वयं के स्वस्थ जीवन हेतु अपने खाद्य क्षमता के अनुसार उचित व स्वस्थ भोजन को प्राप्त कर सकें| खाद्य व कृषि संगठन ने खाद्य सुरक्षा के लिए चार स्तंभ बताए हैं| जो इस प्रकार हैं| खाद्य की उपलब्धता प्राप्त करने की क्षमता उसका प्रयोग तथा स्थायित्व| व्यापार व संवाहनीय विकास हेतु अंतरराष्ट्रीय केंद्र का दायित्व उस अंतरराष्ट्रीय विधि को बनाना है| जबकि खाद्य के मूल्यों को इकट्ठा करने के विरुद्ध हों जिसका सीधा संबंध विश्व खाद्य सुरक्षा व कुपोषण से हो|

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